3 दिसंबर 2018 - 17:35
यमन युद्ध में विकलांग होने वालों का संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय के सामने धरना

सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के माध्यम से यमन पर थोपे गए युद्ध में घायल और विकलांग होने वाले हज़ारों आम नागरिकों ने यमन की राजधानी सनआ में संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर सऊदी गठबंधन के पाश्विक हमलों के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार यमन की राजधानी सनआ में हज़ारों की संख्या में ऐसे प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए जो सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के पाश्विक हमलों में घायल और विकलांग हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के कैम्प कार्यालय के सामने एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्र संघ सहित दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों से मांग की है कि वह सऊदी अरब और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाएं कि वे यमन पर अपने पाश्विक हमलों को तुरंत बंद करें। हज़ारों की संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यमन के आम नागरिकों के नरसंहार, घायल और विकलांग होने का मुख्य कारण सऊदी अरब और उसके गठबंधन द्वारा यमन पर लगातार हमला और इस निर्धन इस्लामी देश की ज़मीनी, हवाई और समुद्री घेराबंदी है।

इससे पहले यमन की राजधानी सनआ के  नगर परिषद में सामाजिक मामलों की समिति के अध्यक्ष हमूद अन्नक़ीब ने भी कहा था कि यमन पर सऊदी गठबंधन द्वारा थोपे गए युद्ध को तुरंत रोक देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध से सबसे अधिक प्रभाव इस देश के आम नागरिकों विशेषकर बच्चों, महिलाओं पर पड़ रहा है और दुनिया को इस संबंध में गंभीरता से सोचना चाहिए ताकि अब और बेगुनाहों का ख़ून न बहे। अन्नक़ीब ने कहा था कि हर दिन दसियों लोग इस युद्ध की भेंट चढ़ रहे हैं और इसी तरह घायलों एवं विकलांगों की संख्या इतनी हो गई है कि अगर यह युद्ध जारी रहा तो इस देश की आधी से ज़्यादा संख्या घायल और विकलांगों की होगी।

उल्लेखनीय है कि यमन पर सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों द्वारा थोपे गए युद्ध और किए जा रहे पाश्विक हमलों एवं घेराबंदी के कारण इस समय यमन में दुनिया की सबसे  भयावह मानव त्रासदी घटित हो रही है। रिपोर्टों के मुताबिक़ इस समय यमन के 75 प्रतिशत लोगों को तत्काल प्रभाव से मानवता प्रेमी सहायता की आवश्यकता है जबकि एक करोड़ चालीस लाख यमनी नगारिक भुखमरी और सूखे से ग्रस्त हैं।